पैसे हैं तो घर खरीदने का यही है सबसे सही समय

राज्यसभा में गुरुवार को रियल एस्टेट बिल पास हो गया है. बिल में कई सारे ऐसे प्रावधान हैं, जिसको लेकर उम्मीद की जा रही है कि इससे बिल्डर्स की मनमानी पर रोक लगेगी. यानी सीधा फायदा ग्राहक यानी हमको-आपको मिलेगा. लेकिन खास बात यह है कि बिल को सदन से धरातल पर आने में अभी करीब छह महीने का समय लगेगा, जबकि इस दौरान बाजार में बिल के मद्देनजर कई बड़े प्रभाव देखने को मिलेंगे.

‘इंडिया टुडे’ हिंदी पत्रिका के संपादक और आर्थि‍क विशेषज्ञ अंशुमान तिवारी कहते हैं कि आने वाले छह महीनों में रियल एस्टेट की दुनिया बदलने वाली है. इसका लाभ न सिर्फ कंज्यूमर्स को होगा, बल्कि‍ इंडस्ट्री को भी ग्रोथ मिलेगी. वे कहते हैं-

1) कॉन्ट्रैक्ट में होगा बदलाव, बदलेंगी शर्तें
रियल एस्टेट बिल के आने से पहले बिल्डर्स की कोशि‍श रहेगी कि वह ग्राहकों के साथ अपने कॉन्ट्रैक्ट्स में हर उस चीज को बदल दें, ताकि मामला रेग्युलेटर तक न पहुंचे. जाहिर तौर पर इस क्रम में शर्तें बदलेंगी और इस दिशा में पारदर्शिता बढ़ेगी. इसका लाभ सीधे तौर पर ग्राहक को मिलने वाला है.

2) बिल्डर्स के लिए भी लाभप्रद
अब तक रियल एस्टेट बाजार में कोई स्पष्ट रूपरेखा नहीं होने के कारण बिल्डर्स की मनमानी जगजाहिर है. लेकिन यह भी सच है कि रियल एस्टेट बिल के आने से बिल्डर्स में भी बाजार के नियमों को लेकर स्पष्टता आएगी. सीधे शब्दों में कहें तो वह क्या करना है और क्या नहीं करना है यह जान लेंगे. हां, इस कारण उन्हें अपने पूरे बिजनेस मॉडल को फिर से तैयार करना होगा.

3) मकानों की ऑफलोडिंग पर रहेगा जोर
बिल्डर्स की पहली कोशिश रहेगी कि वो पहले से बने हुए मकानों को जल्दी से जल्दी बेच दें. यानी मकानों की ऑफलोडिंग शुरू होगी. बाजार में बने हुए मकानों की संख्या बढ़ेगी और ज्यादा मकान होने की वजह से अभी मकान खरीदने का मन बना रहे ग्राहकों को लाभ मिलेगा.

4) मंदी का दौर, घटेगी कीमतें
अगले छह महीने में बाजार में अधि‍क से अधि‍क मकान बेचने पर जोर रहेगा. यह मंदी का दौर है इस कारण मकान की कीमतों में बेतहाशा कमी देखने को मिल सकती है. यानी पास में पैसा है तो मकान खरीदने का इससे बेहतर समय नहीं मिलने वाला.

5) जहां देर हो चुकी है, वहां पोजेशन पर जोर
यह समय उन लोगों के लिए भी लाभप्रद होने वाला है, जिन्हें समय से पोजेशन नहीं मिला है. क्योंकि बिल्डर्स यही चाहेंगे कि रेग्युलेटर के आने से पहले ऐसे सारे मामले निपटा दिए जाएं और कानूनी पचरों में फंसने से बचा जाए.

Courtesy – AAJ TAK

Author
Vikash Pathak

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